तुर्की में अपार्टमेंट संस्कृति और पड़ोसी संबंध

तुर्की में अपार्टमेंट संस्कृति और पड़ोसी संबंध

कृषि अर्थव्यवस्था पर आधारित सामाजिक संरचना गणराज्य को उस्मानी साम्राज्य से विरासत में मिली थी, जो पहले मुख्य रूप से ग्रामीण इलाके थे। हालाँकि, 1950 के दशक में कृषि में सामाजिक-आर्थिक नीतियों में तेजी और विशेष रूप से 1948 की मार्शल योजना, और ट्रैक्टरों की संख्या में वृद्धि के परिणामस्वरूप, ग्रामीण क्षेत्रों से रहने वाले लाखों लोगों ने शहरों का रुख किया, और कृषि गतिविधियों में संरचनात्मक परिवर्तनों का अनुभव किया गया। 1950 के दशक से शुरू होने वाली त्वरित शहरीकरण प्रक्रिया के साथ इस क्षेत्र ने एक नया आयाम प्राप्त किया, और अपार्टमेंट संस्कृति रोजमर्रा की जिंदगी का केंद्र बन गयी। हालाँकि, प्रवासन की वजह से तुर्की में शहर के चारों ओर स्थित पहाड़ी इलाकों में झुग्गी-झोपड़ियां बन गयी थीं, जो औद्योगिकीकरण के साथ-साथ पश्चिमी देशों में शहरीकरण आंदोलन के समानांतर चल रहा था। कई शहरों, विशेष रूप से इस्तांबुल जैसे बड़े शहरों के झोंपड़पट्टी वाले इलाकों में, प्रत्येक झोंपड़पट्टी अपने साथ अपनी संस्कृति लायी, तो इस तरह जहाँ निकट पड़ोस के संबंध बने रहें, वहीं ये संबंध हाल ही में शहरी परिवर्तन परियोजनाओं के साथ कमजोर पड़ने लगे हैं। यहाँ आपके लिए यह विवरण दिया गया है कि आपको तुर्की की अपार्टमेंट संस्कृति और पड़ोसी संबंधों के बारे में क्या जानने की जरुरत है:

तुर्की समाज में पड़ोसी संबंध

हमारे समाज में पड़ोस के सिद्धांत को उन कहावतों के माध्यम से परिभाषित किया जा सकता है जो पड़ोस की प्रकृति और महत्ता का वर्णन करते हैं। सामान्य तौर पर प्रयोग किया जाने वाला वाक्य "घर मत लो, पड़ोसी लो" पड़ोसी के साथ संबंधों की महत्ता पर बल देता है, जो घर की गुणवत्ता के बजाय घर खरीदने के बाद स्थानिक निकटता से जुड़ा होता है। दूसरा वाक्य "पड़ोसी को पड़ोसी की जरुरत होती है", यह बताते हुए पड़ोसी से संबंधों और सामाजिकता पर बल देता है कि स्वभाव से इंसान अपने आप में पर्याप्त नहीं हो सकता और इसलिए दूसरों के साथ रिश्ते स्थापित करके खुद की जरूरतें पूरी की जा सकती हैं। कहावतों के माध्यम से पड़ोस से संबंधों को परिभाषित करना भी संभव है। उदाहरण के लिए; इस वाक्य "पड़ोसी की खातिर" का अर्थ है कि पड़ोसी से संबंधों में एक निश्चित स्तर का सम्मान बनाए रखना चाहिए। किसी ऐसे स्थान पर जाना जो ज्यादा नजदीक नहीं होता उसे "कहीं पड़ोस के दरवाज़े पर जाना" वाक्य से दर्शाया जाता है जो बताता है कि अक्सर पड़ोसी वो लोग होते हैं जो एक-दूसरे के पास आते-जाते हैं।

आस-पड़ोस और एक-दूसरे की मदद करना 

यह ज्ञात है कि तुर्की समाज में सहयोग पड़ोसी संबंधों में एक महत्वपूर्ण तत्व है। "पड़ोस में मरीज होने पर उसकी मदद करना, पड़ोसी के अकेला होने पर उसके लिए सूप बनाना या मरीज के रिश्तेदारों को सूचना देना," "शादी का निमंत्रण मिलने पर जरुरी चीजें देना और परोसना" और "मृत्यु और अंतिम संस्कारों में शांत और सहायक होना" जैसे कार्यों को पड़ोस की धारणा के हिस्से के रूप में माना जाता है। आस-पड़ोस की गपशप में हिस्सा न लेना और गपशप रोकना, पड़ोसियों के साथ खाना बांटना जैसे कार्यों को नैतिक संबंध में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा, विश्वास और गोपनीयता के संदर्भ में किये जाने वाले कार्य भी पड़ोसी के साथ संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जैसे आपातकाल की स्थिति में पड़ोसी के पास घर की चाबी छोड़ना या बच्चे को छोड़ना। जहाँ, यह देखा गया है कि गाँव से शहरी इलाकों में अपार्टमेंट के जीवन में आने के बाद, अपनी ईमानदारी, भरोसे और एकजुटता के लिए मशहूर, पड़ोसी संबंध कमजोर हुए हैं, वहीं यह देखा गया है कि शहरों में अपनी पुरानी जगहों पर एक ही जगह रहने वाले लोग उसी पड़ोस और अपार्टमेंट में अपने रिश्ते बनाये रखने का प्रयास करते हैं जहाँ वो प्रवास करते हैं।

अपार्टमेंट संस्कृति और पड़ोसी संबंधों का कमजोर होना

आवास और सामाजिक परिवर्तन की प्रक्रिया के साथ, ऐसा देखा गया है कि पड़ोसी संबंधों में नए संस्कारों ने जगह ले ली है। स्थानिक निकटता और एक साथ रहने के लिए आवश्यक गतिविधियों के अलावा, जैसे अपार्टमेंट की बैठकों और खर्चों में शामिल होना, अपार्टमेंट प्रबंधन के नियमों का पालन करना, ऐसे नियम भी हैं जो सामाजिकता के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं जैसे अपार्टमेंट में रहने वाले दूसरे लोगों को परेशान करने के व्यवहार से बचना। हालाँकि, वर्तमान में, अपार्टमेंट में जीवन लोगों को एक अलग आयाम में ले जाता है, जिसकी वजह से लोग प्राथमिक संबंधों के बजाय गौण संबंधों को पसंद करते हैं। इस स्थिति का लोगों और पड़ोसियों के संबंधों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और पड़ोसी के साथ संबंधों को कमजोर करता है। इसके अलावा, अपार्टमेंट के जीवन की साझा जिम्मेदारी और अपार्टमेंट के खर्च, शोरगुल और अन्य कारकों में भाग लेने की बाध्यता की वजह से विभिन्न समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ये समस्याएं पड़ोसी के साथ संबंधों को कमजोर बनाती हैं। यह तथ्य कि एक साथ रहने की संस्कृति लगभग बिल्कुल मौजूद नहीं है, इसलिए अपार्टमेंट के जीवन में समस्याएं पैदा हो सकती हैं। एक-दूसरे का अभिवादन करने के अलावा, कई लोग अपने पड़ोसी को नहीं पहचानते हैं, और एक-दूसरे के बारे में कोई जानकारी नहीं रखते हैं।

आज के शहरों में पड़ोस

स्थानिक निकटता के आधार पर नैतिकता, विश्वास, गोपनीयता, एकजुटता जैसे सामाजिक-मनोवैज्ञानिक और सांस्कृतिक आयामों के साथ आस-पड़ोस को सामाजिक रिश्ते का एक रूप माना जा सकता है, जो हर समाज में अलग होता है और कभी-कभी रिश्तेदारों से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। एक-दूसरे से अलग करने पर यह देखा गया है कि पड़ोसी संबंधों के तीन प्रकार होते हैं:

पड़ोसी संबंधों का पहला प्रकार:

आधुनिक समय में यह कम होता हुआ दिखाई दे रहा है, लेकिन यह पड़ोसी संबंधों का सबसे अच्छा प्रकार है, जहाँ पड़ोसी अलग-अलग और परिवारों के साथ एक-दूसरे से गर्मजोशी से मिलते हैं, और जहाँ अंतरंग, अच्छे रिश्तों, और बिना किसी उद्देश्य के एक-दूसरे के यहाँ जाने का अनुभव किया जाता है। इस प्रकार के संबंध में, एकजुटता और सहयोग बहुत उच्च स्तर पर होते हैं। उदाहरण के लिए; नूडल्स, अचार और टमाटर का पेस्ट जैसे व्यंजन घर पर या बगीचे में पड़ोसियों की मदद से तैयार किए जाते हैं। आस-पड़ोस के ऐसे संबंध ज्यादातर बड़े शहरों की झोपड़पट्टियों में या ऐसे स्थानों में देखने को मिलते हैं जहाँ कम आय वर्ग वाले लोग रहते हैं। 

पड़ोसी संबंधों का दूसरा प्रकार:

यह ऐसा संबंध है जो दोस्ती के आधार पर, मुख्य रूप से एकजुटता को दर्शाता है। इस तरह के पड़ोसी संबंध में, पड़ोसियों में ऐसे लोग शामिल होते हैं जो एक साथ रहते और आनंद लेते हुए, घर के बाहर की गतिविधियों में एक साथ हिस्सा लेते हैं। दूसरे शब्दों में, पड़ोसी संबंध स्थान और दोस्ती पर आधारित होता है। सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक स्तर की सहमति रिश्ते का आधार बनाती है। जहाँ दूसरे प्रकार के पड़ोसी संबंधों को अक्सर निचले और मध्यम-आय वर्ग में देखा जाता है, जो तुर्की के अपेक्षाकृत कम विकसित क्षेत्रों में रहते हैं, वहीं सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में सकारात्मक परिवर्तन से पड़ोसी संबंध कमजोर हो रहे हैं।

पड़ोसी संबंधों का तीसरा प्रकार :

यह अपने आपमें रहने वाला पड़ोस होता है जो इस्तांबुल जैसे बड़े शहरों में व्यापक रूप से फैला हुआ है। भौतिक और नैतिक एकजुटता और सहयोग सबसे निचले स्तर पर दिखाई देते हैं। हालाँकि, अपार्टमेंट में रहने वाले लोग एक दूसरे का अभिवादन करते हैं और आपस में बातचीत करते हैं, लेकिन वो अपने पड़ोसियों से मिलने से बचते हैं। इस तरह के पड़ोस में, पड़ोसियों से व्यक्ति की अपेक्षा में निजी जीवन में न आने देना, सामान्य अपार्टमेंट जीवन में एक-दूसरे के साथ हस्तक्षेप से बचना और अनादर न करना शामिल होता है। इस कारण से, सबसे सराहनीय पड़ोसी वो होते हैं जो दूरी बनाकर और सम्मानपूर्ण रहते हैं। रोजमर्रा की आपाधापी में कोई हित शामिल न होने पर पड़ोसियों से मिलना अनावश्यक है, क्योंकि घर आराम और परिवार के साथ समय बिताने की जगह होता है। तीसरे प्रकार के पड़ोसी संबंध ज्यादातर उन क्षेत्रों में पाए जाते हैं जहाँ मध्यम और उच्च आय वर्ग वाले समूह रहते हैं। यह एक ज्ञात तथ्य है कि शिक्षा और संस्कृति के स्तर में वृद्धि और सामाजिक आर्थिक परिवर्तनों के कारण इस तरह के पड़ोसी संबंधों में वृद्धि हो रही है।

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