खुशी की सदियां: तुर्की कॉफ़ी

खुशी की सदियां: तुर्की कॉफ़ी

तुर्की कॉफ़ी की एक ऐसी कहानी है जो सालों से चली आ रही है और उन कुछ चीजों में से एक है जो दुनिया भर में मशहूर है, और तुर्कों के लिए विशेष है। अपने अनोखे स्वाद और सुगंध के साथ, तुर्की कॉफ़ी दोस्ती और बातचीत में और स्वाद घोल देती है। कप में पेश की गयी कॉफ़ी तुर्की लोगों के सपनों को दर्शाती है जो अपने आतिथ्य के लिए प्रसिद्ध हैं। तुर्की में तुर्की कॉफ़ी की महत्ता बताने के लिए, यहाँ की एक मशहूर कहावत है; "एक कप कॉफ़ी किसी व्यक्ति को चालीस साल तक दोस्ती करने के लिए प्रतिबद्ध करती है।"

"तुर्क कॉफ़ी के बिना नहीं रह सकते"

एक कप से 40 साल की यादों के बराबर स्वाद देने वाली तुर्की कॉफ़ी अरब की भौगोलिक स्थिति से आकर सदियों से अनातोलियन संस्कृति का हिस्सा रही है। यमन से आयी यह परंपरा सबसे पहले तुर्की की भूमि पर पहुँची, जिसमें मसाले और सिल्क रोड जैसे व्यावसायिक बिंदु थे, इसके बाद यह पूरे यूरोप में पहुँची।

18वीं शताब्दी के ब्रिटिश यात्री और उपन्यासकार चार्ल्स मैकफर्लेन ने तुर्की संस्कृति में तुर्की कॉफ़ी की जगह को निम्नलिखित शब्दों के माध्यम से बताया है"तुर्क कॉफ़ी के बिना नहीं रह सकते।"

अतीत से आने वाली परंपरा 

तुर्की के इतिहास में कॉफ़ी का इतिहास 14वीं शताब्दी से पाया जाता है। ऐसा माना गया है कि कॉफ़ी शब्द अरबी भाषा के शब्वा कहवा वे से आता है और यह शब्द कफा से आता है, जो वो क्षेत्र है जहाँ अबीसीनिया में कॉफ़ी का उत्पादन होता है। जीते गए स्थानों से होकर महलों तक, इस स्वाद का उदय उस्मानी सुल्तानों के साथ शुरू हुआ है।

तुर्की संस्कृति की परंपराओं में से एक कॉफ़ी बीन्स उस्मानी साम्राज्य में सबसे पहले 1517 में लाये गए थे। यमन की शिक्षा प्रणाली में, जागने और गतिशील रहने के लिए छात्रों द्वारा कॉफ़ी का बहुत अधिक सेवन किया जाता था, और इसकी वजह से राज्यपाल ओज़डेमिर पाशा का ध्यान इसकी ओर गया, जो यमन में सेवारत थे, और फिर उन्होंने इसे तुर्की के सुल्तान, सुलेमान, को तोहफे के रूप में पेश किया। क़ानूनी द्वारा पसंद की जाने वाली कॉफ़ी को सबसे पहले तुर्कों के पारंपरिक खाने की मेज पर रात के खाने के साथ परोसा जाता था, जिसे बाद में कॉफ़ीहाउस में जगह मिली और इसके बाद ये व्यापार की वस्तु बने। सालों तक अपने स्वाद को सुरक्षित रखते हुए यह यूरोप की ओर गया, जिसका स्वाद यूरोपीय लोगों ने शहर के कॉफ़ीहाउस में चखा था और आज तक वहां अपनी जगह बनाये हुए है।

कॉफ़ी शॉप में बातचीत, बातचीत में कॉफ़ी का स्व

तुर्की कॉफ़ी से तुर्क लोगों की मुलाकात के बाद इस्तांबुल के तहतकाले में सैंकड़ो कॉफ़ी शॉप खोले गए। तुर्की कॉफ़ी लोगों के बीच एक अनिवार्य पेय पदार्थ है, जो कॉफ़ीहाउसों में बातचीत को सुखद बनातीनिश्चित रूप से, समाज में जीवनशैली की विशेषताएं किसी समाज में कॉफ़ी के तेजी से प्रसार से सामने आती हैं। जहाँ उस्मानी साम्राज्य के लोग मस्जिद में अपनी प्रार्थना करने के लिए, व्यवसाय स्थलों पर आजीविक कमाने के लिए और अपना पारिवारिक जीवन जीने के लिए घर जाते थे, वहीं कॉफ़ीहाउसों के आने के साथ, तुर्की कॉफ़ी की मेहमाननवाज़ी से एक नयी सामाजिक आदत मिली।

इस्तांबुल के तहतकाले में आज आपको जो कॉफ़ी की दुकानें मिलेंगी, वे इस्तांबुल की सबसे खूबसूरत विरासतों में से एक हैं। मसाला बाज़ार के बगल में, तहमीस मार्ग कॉफ़ी प्रेमियों के लिए एक पवित्र स्थान है। यदि आप हर इस्तांबुलवासी की तरह ताजी कॉफ़ी खरीदना चाहते हैं, तो आपको इस गली में जाना चाहिए जहाँ भुनी हुई कॉफ़ी की खुशबू बसी रहती है।

मेहमानों के स्वागत का प्रतीक; तुर्की कॉफ़ी

वो कॉफ़ी, जिसे पहले लोगों को होश में रखने के लिए और सोने से बचने के लिए पसंद किया जाता था, धीरे-धीरे मेहमानों के लिए सम्मान का प्रतीक बन गयी। उस्मानी साम्राज्य के महल के रसोईघर में काम करने के लिए, कर्मचारियों में एक "कॉफ़ीमेकर" नामक नए कर्मचारी को भी जोड़ा गया। वास्तव में, यह भी अफवाह है कि इस अधिकारी को उन लोगों के बीच से चुना जाता है जो रहस्य रखना जानते हैं और जिनका बहुत महत्व है।


तुर्की परंपरा में, जो लोग शादी करना चाहते हैं उन्हें पहले दुल्हन के पिता से लड़की का हाथ मांगना पड़ता है। इस समारोह के दौरान, होने वाली दुल्हन को मेहमानों के लिए तुर्की कॉफ़ी बनानी पड़ती है। तुर्की परंपरा में कॉफ़ी का स्वाद उन विवरणों में से एक है जो बताता है कि दुल्हन योग्य है या नतुर्की की संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान रखने के कारण, निश्चित रूप से यह कॉफ़ी के साथ की जाने वाली बातचीतों से जुड़ा हुआ है। तहमीस मार्ग के एक कॉफ़ी निर्माता के अनुसार, यहाँ तुर्की कॉफ़ी से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध गलतियां दी गयी हैं, और साथ ही बताया गया है कॉफ़ी को ताज़ा कैसे रखते हैं और अच्छी कॉफ़ी कैसे बनाते हैं

कॉफ़ी पकाने के लिए प्रयोग किया जाने वाला कॉफ़ी का बर्तन सबसे महत्वपूर्ण होता है। कई लोगों के लिए कॉफ़ी बनाने के लिए कॉफ़ी का बर्तन चुनना चाहिए।

प्रति व्यक्ति दो छोटा चम्मच ताज़ी कॉफ़ी डालना सबसे प्रभावी माप है।

अगर चीनी डालनी है तो यह पीसी हुई होनी चाहिए और चीनी के टुकड़े नहीं होने चाहिए।

पकाते समय कॉफ़ी कम आंच पर पकानी चाहिए।

यदि आप कॉफ़ी को चम्मच से मिला रहे हैं, तो पकाने के दौरान चम्मच को किनारे रखते हुए मिलाने की सलाह दी जाती है। क्योंकि चम्मच को सीधा रखने पर कॉफ़ी झाग वाली बनेगी और किनारे रखने पर क्रीमी बनेगी। झाग वाली कॉफ़ी की तुलना में क्रीमी कॉफ़ी ज्यादा अच्छी होती है।

कॉफ़ी पीने से पहले कॉफ़ी के साथ परोसा गया पानी पीना जरुरी होता है। जिससे कॉफ़ी का बेहतर स्वाद आता है।ताज़गी बनाये रखने के लिए, कॉफ़ी को हवाबंद और गंधरहित शीशे के मर्तबान में, फ्रिज के निचले शेल्फ में रखना चाहिए।

संपत्ति
1